सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

13 दिसंबर 2025 लोक अदालत में प्रकरणों के निपटारे से शीघ्र न्याय मिलता हैं। लोक अदालत में निपटारा प्रकारणों में दोनों पक्षों की जीत होती है।

स्थायी लोक अदालत:

विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा-22 क और ख के अंतर्गत, वर्ष 2007 से बिलासपुर, रायपुर, जगदलपुर, इन 05 जिलों में और वर्ष 2011 से दुर्ग एवं सरगुजा (अंबिकापुर) में जनोपयोगी सेवाओं के लिए स्थायी लोक अदालतों का गठन किया गया है। इसके अंतर्गत परिवहन, डाक-तार या टेलीफोन सेवा, किसी भी प्रतिष्ठान द्वारा जनता को बिजली, पानी या विद्युत आपूर्ति, सार्वजनिक स्वच्छता या स्वास्थ्य सेवा प्रणाली, औषधालय या अस्पताल में सेवा, बीमा सेवा, बैंकिंग और अन्य वित्तीय संस्थानों की सेवाएँ, किसी प्रतिष्ठान द्वारा आम जनता को किसी भी प्रकार के ईंधन की आपूर्ति, शैक्षणिक या शैक्षिक संस्थान, आवास और अचल संपत्ति सेवा आदि जैसे जनोपयोगी विवादों का निपटारा होता है।

ज्ञात हो कि आगामी नेशनल लोक अदालत 13 दिसंबर 2025 को आयोजित होने वाला है उक्त नेशनल लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरणों का निराकरण किए जाने के संबंध में तहसील विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष मोहनी कंवर द्वारा आज शुक्रवार को राजस्व, विभाग, अधिवक्तागण, चोलामंडलम, श्रीराम फाइनेंस, नेशनल इंश्योरेंस,बैंक, नगर पालिका, बीएसएनएल, विद्युत विभाग के कर्मचारियों व प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग आयोजित किया गया जिसमें सीजेएम निधि शर्मा, जेएमएफसी आकांक्षा खलखो, अंकित सिंह राजपूत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, उज्ज्वल कुमार,दीपक कुमार साहू आईडीबीआई बैंक, ओम प्रकाश, पंजाब नेशनल बैंक और सूर्यकांत देवांगन बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बीरेंद्र कुमार एसबीआई,जे सी चंद्राकर विद्युत विभाग, कोमल ठाकुर, पियूष चंद्र यदु नगर पालिका, सी.आर. चूरेंद्र बीएसएनएल, रामकुमार जांगड़े, रविप्रताप सिंह श्रीराम फाइनेंस, चिरंजय जंघेल और पैरालीगल वालिंटियर गोलूदास साहू उपस्थित रहे।

नगर पालिका, बीएसएनएल, विद्युत विभाग के कर्मचारियों व प्रतिनिधियों के द्वारा ज्यादा से ज्यादा प्रकरणों के निराकरण हेतु प्रयास किए जाने के लिए जोर दिया गया एवं बताया गया कि उनके द्वारा नेशनल लोक अदालत में प्री लिटिगेशन व पेंडिंग प्रकरण निराकरण हेतु पेश किया गया है।

यहां उल्लेखनीय है कि आगामी नेशनल लोक अदालत में व्यवहार प्रकरण यथा संपत्ति संबंधी वाद, धन वसूली संबंधी वाद, बैंक एवं अन्य वित्तीय संस्थाओं से संबंधित मामले, राजीनामा योग्य दांडिक प्रकरण ,मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, परिवार न्यायालय में लंबित वैवाहिक एवं अन्य मामले, विशेष न्यायालय (विद्युत अधिनियम) में लंबित प्रकरण, अन्य राजस्व संबंधी समझौता योग्य मामले का निराकरण  होता है।

लोक अदालत के लाभ

लोक अदालत में प्रकरणों के निपटारे से शीघ्र न्याय मिलता हैं। लोक अदालत में निपटारा प्रकारणों में दोनों पक्षों की जीत होती है। आपसी राजीनामा के कारण मामलों की अपील नहीं होती। दीवानी प्रकरणों के परिणाम तुरंत मिलता है।दावा प्रकरणों में बीमा कंपनी द्वारा राजीनामा मामलों में तुरंत एवार्ड राशि जमा कर दी जाती है। लोक अदालत में राजीनामा करने से बार-बार अदालतों में आने से रुपयों, समय की बर्बादी व अकारण परेशानी से बचा जा सकता है। लोक अदालत में राजीनामा करने से दीवानी प्रकरणों में कोर्ट फीस पक्षकारों को वापस मिल जाती है, किसी पक्ष को सजा नहीं होती। मामले को बातचीत द्वारा सफाई से हल कर लिया जाता है।सभी को आसानी से न्याय मिल जाता है। फैसला अन्तिम होता है। फैसला के विरूद्ध कहीं अपील नहीं होती है।

अधिक जानकारी के लिए, छत्तीसगढ़ जनसंपर्क की वेबसाईट विजिट करे।

https://dprcg.gov.in/post/1764939894/Raipur-The-National-Lok-Adalat-will-be-organized-on-December-13

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

आपके मूल्यवान सुझाव / विचारों के जरिए इसको एक नया आयाम मिलेगा। आपका यह प्रयास एक सराहनीय कदम साबित होगा।

साइबर सुरक्षा जीवन रक्षा

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

लगभग 90% साइबर हमले मानवीय भूल के कारण होते हैं, जो साइबर सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता के महत्व पर बल देता है। साइबर फ्रॉड की जानकारी भी जीवन रक्षा दवाई है।।

क्या आप जानते है साइबर सुरक्षा ये मानवीय भूलें, जैसे फ़िशिंग ईमेल पर क्लिक करना या कमजोर पासवर्ड का उपयोग करना, साइबर अपराधियों के लिए एक आसान रास्ता प्रदान करती हैं। इस प्रकार, तकनीकी समाधानों के साथ-साथ कर्मचारियों का उचित प्रशिक्षण और सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम साइबर सुरक्षा में बहुत महत्वपूर्ण हैं।   मानवीय भूलों के सामान्य उदाहरण : फ़िशिंग:  दुर्भावनापूर्ण लिंक पर क्लिक करना या हानिकारक अटैचमेंट डाउनलोड करना। कमजोर पासवर्ड:  अनुमान लगाने योग्य पासवर्ड का उपयोग करना, या पासवर्ड को असुरक्षित तरीके से साझा करना या संग्रहीत करना । पैच करने में विफलता:  महत्वपूर्ण सुरक्षा अपडेट स्थापित न करना जिससे सिस्टम कमजोर हो जाता है। गलत डिलीवरी:  गोपनीय जानकारी गलती से गलत व्यक्ति को ईमेल करना। *भौतिक सुरक्षा चूक:  उपकरणों को अनलॉक छोड़ना या संवेदनशील डेटा की भौतिक प्रतियों को असुरक्षित छोड़ देना। क्यों महत्वपूर्ण है साइबर सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता: संभावित खतरों का ज्ञान:  कर्मचारियों को फ़िशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और मैलवेयर जैसे खतरों को पहचानने और...

मोमोस, खाए और फिर चापड़ से प्रेमिका की हत्या, पहचान छुपाने पेट्रोल डालकर लगा दिया आग, ऐसे सुलझी अंधे क़त्ल की गुत्थी... यह भी एक फ्रॉड है सावधान रहे सतर्क रहे।

  छत्तीसगढ़ के दुर्ग में मिली महिला की अधजली लाश की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। पुलिस ने महिला के प्रेमी को गिरफ्तार कर घटनाक्रम का खुलासा किया... दुर्ग। दुर्ग के उतई थाना में 8 दिसंबर की सुबह एक सनसनीखेज घटना सामने आई। आरोपी ने एक महिला की हत्या कर लाश को जला दिया था। घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी विजय अग्रवाल खुद मौके पर पहुंचे थे। महिला का शव बुरी तरह से जल चुका था, जिसकी वजह से इसकी पहचान कर पाना पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। चूंकि महिला की हत्या का मामला था, एसएसपी विजय अग्रवाल ने भी गंभीरता दिखाई और क्राइम, एसीसीयू व थाना पुलिस समेत 6 टीम तैयार की। टीम ने जांच शुरू की तो पता चला कि विजय बांधे नाम के व्यक्ति ने एक महीला की गुमशुदगी की शिकायत सुपेला थाने में दर्ज कराई थी। बस फिर पुलिस ने बिना देरी किये सूचक विजय बांधे को पकड़ा और उससे कड़ाई से पूछताछ की। आरोपी ज्यादा देर पुलिस को गुमराह नहीं कर पाया और हत्या करने की बात कबूल कर लिया। एसएसपी के नेतृत्व में ऐसे सुलझी अंधे कत्ल की गुत्थी दरअसल, 8 दिसम्बर की सुबह ग्राम पुरई निवासी ग्रामीण ने थाना उत्तई म...

फर्जी जॉब ऑफर से रहें सावधान! रट लें सरकार की ये बातें, कभी नहीं होगा साइबर फ्रॉड

अगर, आपके फोन पर जॉब ऑफर वाले मैसेज या कॉल आ रहे हैं तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। इन दिनों कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें फर्जी जॉब ऑफर के नाम पर ठगी की गई है। सरकार ने इससे बचने के तरीके बताए हैं। आज के डिजिटल दौर में नौकरी ढूंढना जितना आसान हो गया है, ऑनलाइन धोखाधड़ी का खतरा उतना ही बढ़ गया है। साइबर अपराधी अब नामी कंपनियों के नाम पर फर्जी जॉब ऑफर भेजकर लोगों से पैसे ठग रहे हैं। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल ने “ऑनलाइन जॉब फ्रॉड” को आधिकारिक अपराध की श्रेणी में रखा है, ताकि लोग इस खतरे को गंभीरता से लें। हाल के महीनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें लोगों से ट्रेनिंग, वीजा प्रोसेसिंग या बैकग्राउंड चेक के नाम पर पैसे वसूले गए। कुछ मामलों में तो भारतीय जॉब सीकर्स को विदेशों में झूठे वादों के जाल में फंसाया गया; जिससे साफ है कि अब सतर्क रहना बेहद जरूरी हो गया है। किसी के भी कंपनी के   नाम पर फर्जी जॉब ऑफर का ऐसा ही  बहुत सारे  मामला सामने आया है, जिसके बाद सरकार ने जरूरी चेतावनी जारी की है। कैसे पहचानें नौकरी फर्जी है या असली? “1.घर ब...