डिजिटल सुरक्षा: भारत के प्रधानमंत्री ने डिजिटल अरेस्ट से बचाव के लिये एक सरल तीन-चरणीय सुरक्षा प्रोटोकॉल की रूपरेखा प्रस्तुत की।
विराम: शांत रहें एवं त्वरित व्यक्तिगत जानकारी देने से बचें।
विचार करना: ध्यान रखें कि विधिक एजेंसियाँ कॉल के माध्यम से ऐसी पूछताछ नहीं करती हैं या कॉल के माध्यम से भुगतान की मांग नहीं करती हैं।
कार्रवाई करना: राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन (1930) या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर घटनाओं की रिपोर्ट करना, परिवार के सदस्यों को सूचित करना एवं साक्ष्य दर्ज करना।
साइबर सुरक्षा के सर्वोत्तम अभ्यास: फायरवॉल का उपयोग करना, जो कंप्यूटरों के लिये सुरक्षा की प्रथम पंक्ति के रूप में कार्य करते हैं, अनधिकृत पहुँच को रोकने के लिये नेटवर्क ट्रैफिक की निगरानी और फिल्टर करते हैं।
सुरक्षा संबंधित कमियों को दूर करने के लिये सभी सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर प्रणालियों को अद्यतन रखना।
उन्नत सुरक्षा: सुरक्षा की एक अतिरिक्त स्तर जोड़ने के लिये टू-फैक्टर प्रमाणीकरण लागू करना। वित्तीय रिकॉर्ड सहित संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिये एन्क्रिप्शन का उपयोग करना।
सतर्कता में वृद्धि: बैंकों को कम शेष वाले या वेतनभोगी खातों में उच्च मूल्य के लेनदेन की निगरानी करनी चाहिये तथा प्राधिकारियों को सचेत करना चाहिये, क्योंकि चोरी का पैसा अक्सर इन खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता है तथा उसके बाद उसे क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर विदेश भेज दिया जाता है।
जागरूकता: कोई भी व्यक्तिगत जानकारी (जैसे आधार या पैन कार्ड विवरण) एवं पैसा न देना।
हमेशा आधिकारिक चैनलों के माध्यम से कॉल करने वाले की पहचान स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना।
सामान्य धोखाधड़ी की रणनीति के बारे में जानें और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये इस जानकारी को अपने परिवार और दोस्तों के साथ साझा करना।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग : समान कानून बनाने, खुफिया जानकारी साझा करने और प्रतिक्रियाओं में समन्वय स्थापित करने के लिये राष्ट्रों के बीच सहयोग से सीमा पार साइबर अपराध से निपटने में सहायता मिल सकती है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
आपके मूल्यवान सुझाव / विचारों के जरिए इसको एक नया आयाम मिलेगा। आपका यह प्रयास एक सराहनीय कदम साबित होगा।
साइबर सुरक्षा जीवन रक्षा