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ऑनलाइन ठगों से हो जाएं सावधान! डिजिटल फ्रॉड में फिर से आ गई तेजी, आरबीआई ने किया आगाह

ऑनलाइन ठगों से हो जाएं सावधान! डिजिटल फ्रॉड में फिर से तेजी आई, आरबीआई ने आगाह कर दिया

डिजिटल धोखाधड़ी: भारत में डिजिटल धोखाधड़ी के मामले जुलाई 2025 से फिर तेजी से दर्ज किए गए हैं। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर ने चेतावनी दी कि ऑनलाइन ठगी सक्रिय हो गई है और बैंकों को टेक्निकल रिजर्व बैंक अपनाना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, 60% फोर्ड प्राइवेट ठिकाने जुड़े हुए हैं। आरबीआई ने 'म्यूलेशन हंटर' सिस्टम से धोखाधड़ी पर निगरानी रखी है। डिजिटल फ़्रॉड से डिजिटल फ़्रॉड में रहने की सलाह दी गई है।

डिजिटल फ्रॉड:  ऑनलाइन ठगों से सावधान रहें। इसका कारण यह है कि देश में डिजिटल धोखाधड़ी एक बार फिर तेजी से बढ़ी है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर ने चेतावनी दी है कि देश में फिर से डिजिटल धोखाधड़ी (डिजिटल फ्रॉड) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जुलाई 2025 से फोर्ड के मामलों में अचानक वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे वित्तीय क्षेत्र और अभिलेखों के बीच की स्थिरता की आवश्यकता बढ़ गई है।

जुलाई से फिर बढ़ा धोखाधड़ी का मामला

टी रबी शंकर ने शुक्रवार को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) के एक कार्यक्रम में कहा कि इस साल की शुरुआत से लेकर जुलाई तक धोखाधड़ी के मामलों में गिरावट आई थी, लेकिन जुलाई के बाद से मामलों में फिर से उछाल आ गया है। उन्होंने बताया कि यह वृद्धिशील या चक्रीय हो सकता है और इस प्रवृत्ति के आधार पर मूल्यांकन किया जा रहा है।

डिजिटल भुगतान में सबसे ज्यादा फ्रॉड

आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार, देश में वित्त वर्ष 2024-25 में धोखाधड़ी के मामलों की संख्या 23,953 रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 36,000 से अधिक थी। इन मामलों में ज्यादातर घटनाएं डिजिटल भुगतान चैनल, कार्ड और इंटरनेट से जुड़ी हुई हैं। निजी क्षेत्र के बैंकों की संख्या के आधार पर 60% मामले जिम्मेदार हैं, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का हिस्सा मूल्य के आधार पर 71% से अधिक है।

म्यूल हंटर सिस्टम से धोखा पर निगरानी

आरबीआई ने हाल ही में 'म्यूसिल हंटर' नाम से एक डिजिटल सिस्टम शुरू किया है। यह सिस्टम उन दस्तावेजों का पता लगाने में मदद करता है, जिनके माध्यम से धोखाधड़ी की नकदी को आगे भेजा जाता है। इस धोखे की सांता की पूंजी और चैंपियनशिप प्रक्रिया को और मजबूत बनाया गया है।

फिनटेक कंपनी से भव्यता,

टी रबी शंकर ने कहा कि जब यूपीआई (यू क्रूज़) की शुरुआत हुई थी, तब पारंपरिक संस्थानों ने अपनी क्षमताएं पूरी तरह से विकसित नहीं की थीं। इसके विपरीत, फिनटेक कंपनी ने डिजिटल फाइनेंस सेक्टर में अपनी वित्तीय संरचना और निर्णय क्षमता के दम पर बड़ी जगह बनाई। उनका मानना ​​था कि पारंपरिक बैंक उच्च कंसोलिडेट लागत, विस्तृत शाखा नेटवर्क और कॉम्प्लेक्स आईटी के कारण हैं, जिससे वे बाजार में पीछे रह सकते हैं।

संस्थानों को तकनीकी परिसंपत्तियाँ प्रदान की जानी चाहिए

रिजर्व बैंक डिप्टी गवर्नर ने चेतावनी दी कि केवल "क्रमिक डिजिटलीकरण" करने से बैंक प्रतिस्पर्धी नहीं बनेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें मुख्य अवसंरचना (कोर इन्फ्रा लैब्स) को आधुनिक बनाना होगा, ताकि वे फिनटेक ओरिएंटल में टिके रहें। उन्होंने यह भी कहा कि अब बैंकों की स्कोडाटाटा शीट पर नहीं, बल्कि डेटा प्रबंधन और तकनीकी क्षमता पर निर्भर है।

खतरे की निशानदेही के लिए विज्ञापन डिजिटल हो सकते हैं

टी रबी शंकर ने निजी डिजिटल टिकटें लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि इससे बैंकों को खतरा हो सकता है। इसके साथ ही, उन्होंने बताया कि सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) के आगमन से लेकर उद्योग तक बड़े पैमाने पर बदलाव और पदों को इसके प्रभाव में शामिल किया जाना चाहिए।

डिजिटल फ़्रॉड का ख़तरा ख़त्म नहीं हुआ

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर का बयान है कि भारत में डिजिटल फ्रॉड का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। डिजिटल इकोनॉमी की सिक्योरिटी और टेक्निकल सिक्योरिटी को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि डिजिटल इकोनॉमी की सिक्योरिटी स्थिर रह सके।
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